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सतीश शर्मा
केजरीवाल शासन की मुहूर्त लग्न
अरविन्द केजरीवाल ने 14 फरवरी, 2015 को दिल्ली में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। यह शपथ लग्न इस प्रकार से है-
इस मुहूर्त लग्न में मुहूर्त शास्त्र के कुछ नियमों का पालन किया गया है। जैसे सूर्य उत्तरायण में हैं, बृहस्पति, शुक्र और चंद्रमा उदित हैं। मंगल, सूर्य लग्नेश और दशमेश में से केवल शनि बलवान हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र में राज्याभिषेक हुआ है जो कि उन तेरह नक्षत्रों में से एक है जो कि राज्याभिषेक के लिए उत्तम माना गया है। लगभग सभी ग्रहों का ष्ाड्बल उत्तम है और औसत से अधिक है। शुक्र का दशम में होना अच्छा है।
इस मुहूर्त लग्न की आलोचना : जन्म लग्न में चंद्रमा नीच राशि में हैं और वृष्ाभ लग्न है। अरविन्द केजरीवाल की स्वयं की जन्म पत्रिका में लग्न राशि वृषभ है जो कि उचित नहीं है। मुहूर्त चिन्तामणि के अनुसार जन्म लग्न या जन्म राशि से उपचय स्थान में प़डने वाली राशियों में से एक मुहूर्तü लग्न होनी चाहिए। पाप ग्रहों का मुहूर्त लग्न के 3, 6, 11 स्थान में होना शुभ माना गया है परन्तु यहाँ तीसरे और छठे भाव में अशुभ ग्रह नहीं हैं। केन्द्र स्थान में शुभ ग्रह होने चाहिएं। चन्द्रमा और शुक्र तो शुभ ग्रह हैं परन्तु शनि और सूर्य ठीक नहीं हैं क्योंकि सूर्य नीच नवांश में चले गए हैं। मुहूर्तü लग्न की नवांश कुण्डली और भी कमजोर है क्योंकि मंगल, बुध, गुरू और शनि नीच नवांश में चले गए हैं। तीनों त्रिकोणों में से केवल नवम में शुभ ग्रह बुध हैं परन्तु वे भी नीच नवांश में चले गए हैं।
अभिषेक लग्न से पाँचवें भाव में पाप ग्रह हों तो मुहूर्त चिन्तामणि में पुत्र का कष्ट बताया गया है। यहाँ पुत्र से तात्पर्य उनके मतदाताओं से लिया जा सकता है। चौथे और सातवें पाप ग्रह हों तो राजा पदभ्रष्ट होता है अर्थात् अधिकारहीन हो जाता है। इस हेतु निम्न श्लोक उद्धृत किया जा रहा है-
पापैस्तनौ रूङ्निधने मृति: सुते पुत्रातिरर्थव्ययगैर्दरिद्रता।।
 स्यात् खेùलसो भ्रष्टपदो द्युनाम्बुगै: सर्व शुभं केन्द्रगतै: शूभग्रहै:।।

यह मुहूर्त लग्न देखने में अच्छी है परन्तु चार ग्रहों का नीच नवांश में होना खटकता है। यद्यपि इन सभी ग्रहों का ष्ाड्बल अच्छा है परन्तु फिर भी शुक्र का षष्ठेश होकर दशम में बैठना, बृहस्पति का अष्टमेश होकर सप्तम और नवम को देखना, केतु का शनि और चन्द्रमा की युति पर दृष्टि होना तथा अरविन्द केजरीवाल की जन्म लग्न का ही मुहूर्त लग्न होना अच्छे लक्षण नहीं हंै। अरविन्द केजरीवाल की स्वयं की जन्म कुण्डली शक्तिशाली है परन्तु दशमेश शनि नवांश और दशांश कुण्डली में नीच राशियों में चले गए हैं। दशांश कुण्डली में शनि, गुरू और मंगल नीच राशि में हैं जो कि स्थाई शासन में बाधक हैं। इस समय उनको बृहस्पति महादशा में सूर्य अन्तर्दशा चल रही है जो कि नवांश और दशांश कुण्डली में बलवान हैं जिसके कारण उनको शासन मिला परन्तु यह स्थिति आने वाली अन्तर्दशाओं में क्रमश: कमजोर होती चली जाएगी। उनको असली नुकसान तब होगा जब कि गुरू में मंगल अन्तर्दशा चल रही होगी जो 17 अप्रैल, 2017 से 24 मार्च 2018 तक रहेगी। इस समय जनता का काफी हद तक मोह भंग हो जाएगा। उनकी दशांश कुण्डली में बृहस्पति और मंगल दोनों नीच राशि में हैं और एक दूसरे से सप्तम में स्थित हैं। इस समय अरविन्द केजरीवाल कानूनी दावपेंच में फंसे रहेंगे और कई परिस्थितियाँ उनके विपरीत भी जाएंगी। अरविन्द केजरीवाल के लिए सबसे घातक समय गुरू महादशा की राहु अन्तर्दशा में रहेगा जो कि मार्च 2018 से अगस्त 2020 तक रहेगी। गुरू और राहु एक दूसरे से छठे, आठवें में स्थित हैं और इस समय उनके दल में भारी फूट नजर आएगी।
 तमाम आलोचनाओं के बावजूद 2019 के बाद नरेन्द्र मोदी की कुण्डली शक्तिशाली हो रही है परन्तु 2018 में जन्म अरविन्द केजरीवाल की अन्तर्दशाएँ कमजोर चल रही होंगी उस समय स्वयं नरेन्द्र मोदी की कुण्डली बहुत अच्छी नहीं चल रही होगी। ज्योतिष मंथन के जुलाई, 2014 के अंक में सम्पादकीय में हमने लिखा था कि ""ज्योतिष मंथन सत्ता पक्ष की ज्योतिष सम्बन्धी अवहेलनाओं का समर्थन नहीं करती। नरेन्द्र मोदी सरकार ने शपथ ग्रहण समारोह के समय उन नियमों का पालन नहीं किया है जो कि राज्याभिषेक के लिए गढे़ गए हैं। न ही राज्याभिषेक के लिए प्रशस्त नक्षत्र का चयन किया गया है और अष्टम भाव की शुद्धि का भी ध्यान नहीं रखा गया है। नरेन्द्र मोदी कितने ही शक्तिशाली हों मुहूर्तü में की गई गलती का खामियाजा उनको भोगना ही पडे़गा।"
 हम देख रहे हैं कि मुहूर्त लग्न की कुण्डली अच्छी नहीं होने के कारण नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में थो़डी कमी आई है, उनकी आलोचना बढ़ी है और कई मामलों में वे ऎसी गलती कर रहे हैं जिनके कारण दिल्ली के लोग उन से नाराज हुए और केजरीवाल को समर्थन दे गए। कोई कितना ही शक्तिशाली हो ग्रह प्रसन्न न हों तो उनकी सफलता स्थायी नहीं होती। नरेन्द्र मोदी इस समय भाग्य के स्वामी चन्द्रमा की महादशा के अन्तर्गत चल रहे हैं परन्तु फिर भी दिल्ली की पराजय ने उनकी तेजस्विता पर असर डाला है। हाँ, यह अवश्य होगा कि इस कारण से केन्द्र सरकार अपने कार्यक्रमों को ज्यादा सावधानी से और अच्छे ढंग से प्रस्तुत करेगी।
जहाँ तक ज्योतिष मंथन का प्रश्न है हम हमेशा निष्पक्ष एवं निर्भय होकर भविष्यवाणी करते हैं। कांग्रेस के सम्पूर्ण पतन और राहुल गाँधी की तुलना में नरेन्द्र मोदी की कुण्डली भारी प़डने की भविष्यवाणी भी हमने मई, 2014 के अंक (जो कि 5 अप्रैल को बाजार में आ गया था) में की थी परन्तु उनकी मुहूर्त लग्न की आलोचना भी हम ने की थी (जुलाई, 2014 के अंक में)। अब हम पुन: भविष्यवाणी कर रहे हैं कि आगे चलकर केजरीवाल की अन्तर्दशाएँ कमजोर हैं और इसका नुकसान उनको झेलना पडे़गा। उनके शासन को तो अभी कोई आँच नहीं आएगी परन्तु अगली लोकसभा के लिए जब वे चुनाव ल़डने की बातें करेंगे तो उनकी दशा-अन्तर्दशाएँ इतनी साथ नहीं देंगी। अरविन्द केजरीवाल की वृषभ लग्न की शपथ ग्रहण में चन्द्र राशि वृश्चिक है जो कि साढे़ साती के प्रभाव के अन्तर्गत चल रही है। साढे़ साती की मध्यम ढैय्या में 14 मार्च से शनि वक्री हो रहे हैं जो कि 1 अगस्त तक वक्री रहेंगे। बृहस्पति पहले से ही वक्री चल रहे हैं जो कि 8 अप्रैल तक वक्री रहेंगे अर्थात दोनों ग्रह 14 मार्च से 8 अप्रैल तक एक साथ ही वक्री रहेंगे। इस समय अरविन्द केजरीवाल केन्द्र से टकराव मोल लेते हुए ऎसी गलतियाँ करेंगे जो उनके मतदाताओं को पसंद नहीं आएंगी। बहुत सारे मतदाताओं का मोह भंग हो जाएगा। केन्द्र सरकार सधी हुई चालें चलकर केजरीवाल को एक्सपोज करने की कोशिश करेगी और आंशिक सफलता पाएगी। केजरीवाल अपने चुनाव मेनीफेस्टो को केन्द्र सरकार से भुनाने की चेष्टा और असफल रहेगी। यह समय मतदाताओं के पुन: ध्रुवीकरण का होगा यद्यपि कोई चुनाव सिर पर नहीं है।
 अगले आम चुनावों में बीजेपी चन्द्रमा की महादशा के अन्तर्गत चल रही होगी । याद रहे बीजेपी की कुण्डली में चन्द्रमा नीच राशि में ज्येष्ठा नक्षत्र में स्थित हैं। इस कुण्डली में नीच भंग राजयोग होने के कारण उन्हें चन्द्रमा की अन्तर्दशा में ही पहली बार शासन मिला था और अब वह नीच भंग राजयोग अरविन्द केजरीवाल या कांग्रेस पर भारी प़ड सकता है।
अधिक जानकारी के लिए और कुण्डलियों के लिए ज्योतिष मंथन पुस्तक का अप्रैल 2015 का अंक देखें जो कि होली के तुरंत बाद बाजार में उपलब्ध रहेगा।
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